नई दिल्ली/ मंगलवार को एक आश्चर्यजनक घटना निगम बोध घाट श्मशान की आई जब करोल बाग निवासी वीर सिंह की लम्बी बीमारी के बाद देहांत हो गया. शोकाकुल परिवार एवम सगे सम्बन्धी सुबह 11 बजे पार्थिव शरीर को लेकर निगम बोध घाट पर अंतिम संस्कार के लिए पहुँचा. इस दौरान आम आदमी पार्टी के विधायक विशेष रवि सहित विधानसभा के मुख्य सचेतक दिलीप पांडे बहुत बड़ी संख्या में गणमान्य लोग भी अंतिम यात्रा शामिल हुए. दाह संस्कार के बाद आख़िरी चरण में जब बिदाई का समय होता है तो शोकाकुल परिजन की तरफ से दाह संस्कार करने वाले पंडित को 750 रुपये जोकि निर्धारित रेट है दिया जा रहा था. लेकिन उस पण्डित ने पैसे लेने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि इसमें साफ सफ़ाई और झाड़ू लगाने वाले को भी पैसे देने पड़ेंगे कह कर रुपये लेने से इंकार कर दिया जबकि मृतक आत्मा के परिजन लगातार पण्डित से अनुरोध करते रहे की रुपये ले लो. इसी बीच किसी अन्य ब्यक्ति ने रुपये नहीं लेने वाले पण्डित के ऊपर तन्ज कश दिये. जिससे आवेश में आकर वहाँ के सभी कर्मचारीगण ने शोकाकुल परिवार से कहने लगे की हमे तुम्हारा पैसे नहीं चाहिये और धमकाते हुए बोलने लगे कि आगे से कभी भी इस श्मशान में बॉडी लेकर मत आना. पहले से ही दुखो का पहाड़ झेल रहे शोकाकुल परिवार वहाँ से चला आया और आज जब सुबह अंत्येष्टि का फूल लेने गया तो पंडितों ने एक सुर में वहाँ विधि विधान से फूल को नहीं चुगने मे मदद की बल्कि कहा की अंत्येष्टि का फूल खुद ही चुन लो. उनके इस सभी गैर जिम्मेदाराना रवैये में यहाँ की एनजीओ के मैनेजर का पूरा हाथ रहा है। आपको बता दे की पहले भी यहाँ पर इस तरह की मनमानी की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं लेकिन यहाँ पर दाह संस्कार से सम्बन्धित मामले की वजह से लोग चुप्पी साध लेते हैं जबकि यहाँ पर कार्यरत तमाम लोगों का ब्यवहार आमार्यदित रहता है।

Posted By: विशेष संवाददाता