नई दिल्ली/ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाहक दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि ऐसा नहीं कहा जा सकता कि पहले जो शिक्षा नीतियां आई वह सब खराब थी. उच्च शिक्षाविदों ने जो नीतियां बनाई उनके क्रियान्वन में कहीं न कहीं दिक्कत हुई, क्योंकि उसके लिए जवाबदेही पक्का नहीं की गई थी. दत्तात्रेय प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत द्वारा पुस्तक “भारतीय संस्कृति के आलोक में शिक्षा- अपेक्षाएं एवं संभावनाएं” के लोकार्पण अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय में बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे। डीयू के कान्वेंशन हाल में आयोजित इस लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने की। इस अवसर पर कुलपति ने कहा कि मानवता पर संकट के कारण और निवारण दोनों ही विश्वविद्यालयों के अंदर हैं. दत्तात्रेय ने कहा कि उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय में कई वर्षों के बाद आने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ है. 30 वर्षों तक उनका शिक्षा से संपर्क कर रहा है और इस विश्वविद्यालय में भी 25 बार वह आए. उन्होंने पुस्तक के लेखक के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि प्रो. राजपूत का नाम देश के मूर्धन्य शिक्षाविदों में अग्रणी पंक्ति में है. वर्तमान संदर्भ में देश और दुनिया में क्या चल रहा है, इसे ध्यान में रख कर शिक्षा क्षेत्र के बारे में लिखने के आधिकारिक पुरुष हिंदुस्तान में कोई हैं, तो उनमें से प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत एक हैं. उन्होंने बताया कि प्रो. राजपूत ने एनसीआरटी और एनसीटीई सहित बहुत सारे शिक्षा संस्थानों का नेतृत्व किया है। ऐसे विषय पर पुस्तक लिखने का ज्ञान अनुभव और अधिकार प्रो. राजपूत के पास है। दत्तात्रेय ने पुस्तक के रूप में इस ज्ञान को राष्ट्र के सामने लाने के लिए लेखक का हार्दिक आभार जताया। उन्होंने कहा कि भारत के बारे में यह बार-बार कहा जाता है कि यहां की शिक्षा की परंपरा बहुत प्राचीन है. दत्तात्रेय ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था में लोकमान्य तिलक, सावित्रीबाई फुले, महामना मालवीय और रविंद्र नाथ टैगोर आदि का जिक्र करते हुए कहा कि देश के विभिन्न भागों में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इन महापुरुषों ने शिक्षा के बारे में भारतीय शिक्षा के लिए काम किया. उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने बहुत सारी गलतियां की और यहां की शिक्षा प्रणाली को नष्ट किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने अपने अध्यक्षयीय भाषण में कहा कि आज सभी विश्वविद्यालय इस काम में लगे हुए हैं कि कैसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति को कार्यान्वित किया जाए. ऐसे में यह पुस्तक सही समय पर प्रकाशित हुई है.उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति के उस मसौदे को करीब 3 साल में बहुत से लोगों ने पढ़ा है और कार्यान्वित करने का प्रयास किया है। उसके परिणाम आने में अभी वक्त लगेगा। कुलपति ने कहा कि जब शिक्षक इस पुस्तक को पढ़ेंगे तो हम सबको इस में से कुछ ना कुछ सीखने को मिलेगा. कुलपति ने उपस्थित सभी शिक्षकों से आह्वान किया एक बार इस पुस्तक को जरूर पढ़ें। प्रो. योगेश सिंह ने शिक्षा की परिभाषा को सरल शब्दों में बताते हुए कहा कि समझ की समझ को विकसित करना ही शिक्षा है। इस पुस्तक के माध्यम से प्रो. राजपूत ने यही समझाने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि यदि समझ की समझ पर विश्वविद्यालयों में सोच विकसित नहीं होगी तो उसके घातक परिणाम आएंगे। कुलपति ने अंत में कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय से अपेक्षा है कि हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सही तरीके से, सही समय पर, सही संदर्भों में कार्यान्वित करें। यह पुस्तक उसमें अहम भूमिका निभाएगी, ऐसी मेरी अपेक्षा है। पुस्तक के लेखक प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत ने पुस्तक का परिचय देते हुए बताया कि “यह पुस्तक बड़ी सामान्य भाषा में है। नई शिक्षा नीति में जो एक वाक्य कहा गया है कि प्राचीन भारतीय संस्कृति के आलोक में यह शिक्षा नीति तैयार की गई है। इसी एक वाक्य के आसपास मैंने इसे बुनने की कोशिश की है।” उन्होंने कहा “मनुष्य जाति का अस्तित्व बचाने के लिए मनुष्यत्व चाहिए और उसी मनुष्यत्व के रास्ते के लिए नई शिक्षा नीति आई है। यह शिक्षा नीति अपेक्षा करती है कि हम मनुष्य को शिक्षा के महत्व को समझाएं, ज्ञान भी दें, लेकिन प्रज्ञा, बुद्धि और विवेक को ना भूलें। इस पुस्तक में मैंने इन्हीं चीजों को सामान्य भाषा में रखने का प्रयास किया है।” प्रो. सत्यपाल सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और मंच संचालन किया। समारोह के समापन पर डीन ऑफ कॉलेजेज प्रो. बलराम पाणी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर डीयू दक्षिणी दिल्ली परिसर के निदेशक प्रो. श्री प्रकाश सिंह, अंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनु सिंह लाठर, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र, महाराजा सूरजमल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र, एसओएल की निदेशक प्रो. पायल मागो और डीयू रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता आदि सहित भारी संख्या में गणमान्य व्यक्ति, शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Posted By: विशेष संवाददाता