नई दिल्ली/हॉस्पिटल्स एंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड मेडिकल साइंसेज (HIIMS) ने गुरुवार को नई दिल्ली के एलटीजी ऑडिटोरियम में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके एकीकृत चिकित्सा विज्ञान के प्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी द्वारा लिखित पुस्तक When Cure is Crimeका विमोचन किया गया. इस दौरान देश भर के तमाम राज्यों के मरीजो ने KIDNEY से संबन्धित रोगी ने घर बैठे HIIMS के नियमावली का पालन करते हुए डायलिसिस से छुटकारा पा चुके हैं, लाईव आकर अपने अपने अनुभव साझा किये. इस दौरानपी आईएल मैन ऑफ इंडिया से मशहूर सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि एकीकृत चिकित्सा के क्षेत्र में एक प्रमुख व्यक्ति डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी ने दर्शकों के साथ उल्लेखनीय केस अध्ययनों को साझा किया, ऐसे रोगियों को दिखाया गया जिन्होंने नवीन और अपरंपरागत चिकित्सा दृष्टिकोण अपना कर डायलिसिस (सीकेडी), इंसुलिन (मधुमेह प्रकार 1), और ब्लड ट्रांसफ्यूजन (थैलेसीमिया) से मुक्ति हासिल की है.इस कार्यक्रम ने उपस्थित लोगों को पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल मानदंडों को चुनौती देने वाली क्रांतिकारी चिकित्सा सफलताओं की जानकारी देने का एक मंच प्रदान किया है. वहीं आज लाँच की गई बुक When Cure is Crime के बारे में बताते हुए डा. बिस्वरूप रॉय चौधरी ने कहा, भले ही हमें 1947 में आजादी मिल गई, लेकिन हम आज भी विदेशी दवाओं पर निर्भर हैं. दवाएं हमारे जीवन का एक बड़ा हिस्सा बन गई हैं, लेकिन यह जानना महत्वपूर्ण है कि दवाओं के बारे में क्या कानून हैं?" ड्रग्स एंड मेडिसिन एक्ट बहुत समय पहले अंग्रेजों द्वारा बनाया गया था.अब ये कानून हमें अपनी प्राचीन भारतीय स्वास्थ्य पद्धतियों का उपयोग करने से रोक रहा है, जो अक्सर आधुनिक दवाओं से बेहतर काम कर सकती हैं. अपनी नई किताब में, मैं साझा करना चाहता हूं यह ज्ञान मेरे उन सभी रोगियों के पास है जो GRAD (गुरुत्वाकर्षण प्रतिरोध और आहार) का उपयोग करके बेहतर हो गए हैं. वहीं उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में आपको QR कोड मिलेंगे जिन्हें आप विस्तृत चिकित्सा रिपोर्ट देखने के लिए स्कैन कर सकते हैं, जो साबित करते हैं कि ये विधियाँ वास्तव में काम करती हैं. GRAD,इसमें गर्म पानी के उपचार जैसी चीजें शामिल हैं, जिससे क्रोनिक किडनी रोग और दोनों प्रकार के मधुमेह जैसी समस्याओं को ठीक करने में मदद मिली है.पुस्तक में, मेरे मरीज बेहतर होने की अपनी कहानियाँ साझा करते हैं, जिससे पता चलता है कि सच्ची स्वास्थ्य स्वतंत्रता संभव है।

Posted By: विशेष संवाददाता