नई दिल्ली/ बिस्वरूप रॉय चौधरी के एक अनूठे नए अध्ययन से एक दिलचस्प तथ्य सामने आया है कि दिन भर बैठे रहने वाला काम करने के बावजूद दर्जी लोग हमारे बीच सबसे स्वस्थ रूप में सामने आए हैं.नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती के अवसर पर डाक्टर बिस्वरूप ने अपनी नई किताब, लैट यौर सेकेंड हार्ट हैल्प के माध्यम से एक चौंकाने वाले अध्ययन का अनावरण किया.यह स्टडी एक किताब के रूप में आज यहां सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान जारी की गई.डाक्टर बीआरसी के नाम से मशहूर, डॉ. बिस्वरूप अपनी इस खोज को लेकर इतने आश्वस्त हैं कि उन्होंने एक चेलेंज की घोषणा कर दी कि यदि कोई ऐसे दर्जी को ढूंढ लाता है जिसे डायबिटीज हो, तो वह एक लाख रुपए का इनाम जीत सकता है. यह अभूतपूर्व रहस्योद्घाटन सिलाई मशीन चलाते समय पैरों की गति के बारे में उनकी गहरी समझ से उपजा है. पिंडली की मांसपेशियों को अक्सर दूसरा हृदय भी कहा जाता है और सिलाई मशीन का लैग पैडल चलाने से इनका पम्प सक्रिय हो जाता है.उन्होंने अत्याधुनिक वैज्ञानिक प्रमाण और आयुर्वेदिक ज्ञान पर आधारित एक वासो-स्टिम्यूलेशन थेरेपी (वीएसटी) विकसित की है.इसकी प्रेक्टिस करने के लिए, 12-डिग्री सेल्सियस और 42-डिग्री सेल्सियस तापमान बनाए रखने में सक्षम दो बाल्टियों की आवश्यकता होती है.हाल ही में वियतनाम सरकार के शीर्ष नेतृत्व व अधिकारियों की उपस्थिति में हो ची मिन्ह सिटी में एक भव्य कार्यक्रम के बीच इस स्टडी का अनावरण किया गया था. इस मौके पर डॉ. बीआरसी ने कहा इन विधियों का उद्देश्य स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों के प्रबंधन में तीव्र एवं प्रभावी परिणाम हासिल करना है, जैसे कि बुखार पर तत्काल नियंत्रण या डायबेटिक न्यूरोपैथी से पीड़ित किसी व्यक्ति को राहत प्रदान करना. ये विधियां आधुनिक हैल्थकेयर सिस्टम द्वारा प्रयोग किए जाने वाले अप्रभावी या हानिकारक तरीकों से बचने में भी मदद करती हैं, जैसा कि मेरी किताब, द केस अगेंस्ट आईएमए में बताया गया है.इस नई पहल का उद्देश्य दूसरे हृदय की क्षमता का उपयोग करके लोगों को एच.ई.एल.पी. (हैंडलिंग इमर्जेंसी, लाइफस्टायल डिसीजेज, एंड पेन) से निपटने के लिए सशक्त करना है.डॉ. बीआरसी ने कहा कि लैट द सेकेंड हार्ट एच.ई.एल.पी. (हैल्प) किताब पढ़कर कोई व्यक्ति दूसरों की मदद कर सकता है अथवा एच.ई.एल.पी. प्रेक्टिसनर बन सकता है. इसके लिए दो माह के ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लेना होता है, जिसमें दयानंद आयुर्वेदिक कॉलेज जालंधर में सात दिन का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी शामिल है। वीएसटी पहले से ही हिम्स ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स में ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल का एक हिस्सा है.डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी पोषण के गणितीय मॉडल के जनक हैं, जिसे डीआईपी डाइट के रूप में जाना जाता है, और जो भारत (आयुष मंत्रालय), नेपाल (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय) और मलेशिया (लिंकन यूनिवर्सिटी) में नैदानिक परीक्षणों के माध्यम से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, अस्थि रोगों तथा क्रोनिक किडनी रोगों (सीकेडी) में प्रभावी साबित हुई है.इसके अलावा, डॉ. बीआरसी गुर्दा रोगियों को डायलिसिस से छुटकारा दिलाने में मददगार गुरुत्वाकर्षण-आधारित ग्रैड सिस्टम के भी आविष्कारक हैं. डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी, इंजीनियरिंग में स्नातक और मधुमेह में स्नातकोत्तर और मधुमेह व क्रोनिक किडनी रोग में मानद पीएचडी की योग्यता प्राप्त कर चुके हैं.लगभग 30 किताबों के लेखक होने के अलावा, वह हिम्स अस्पताल समूह की सफलतापूर्वक देखरेख भी करते हैं जो भारत, वियतनाम और मलेशिया में स्वास्थ्य सेवा में संलग्न है। अधिक जानकारी के लिए, लॉग ऑन करें।

Posted By: अशोक धवन