नई दिल्ली/नई दिल्ली के ओपी जिंदल ऑडिटोरियम में में आयोजित एक कार्यक्रम में शिक्षा, स्थिरता और शून्य कार्बन के स्विचबोर्ड से रिचर्ड मैकडोनाल्ड, सौम्या खुराना, ब्रह्मकुमारी नई दिल्ली की प्रमुख बीके रामा और मनोज जैन और पंडितों ने समारोह का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों के मन को जागृत करना, उनके शरीर को स्फूर्ति देना और उनकी सांसों में सामंजस्य बनाना था. बता दें कि प्रज्ञा का विचार सौम्या खुराना का है, जो पहले से मौजूद ज्ञान को साझा करने के लिए एक मंच बनाने के मिशन के साथ एक दूरदर्शी सोच बनाने को लेकर है. इन्होंने पूर्व के शाश्वत ज्ञान और आधुनिक पश्चिमी ज्ञान को मिलाकर एक स्थायी भविष्य की दिशा में एकीकृत मार्ग प्रशस्त करने का कार्य किया है. जानकारी के मुताबिक परम पूज्य दलाई लामा के शब्दों, "पूर्व के प्राचीन ज्ञान को पश्चिम तक ले जाने के लिए" से प्रेरित होकर, प्रज्ञा ने लोगों को अपने, अपने शरीर, दिमाग और सांस के साथ अपने संबंधों को फिर से बनाने के लिए आमंत्रित किया गया.बता दें कि इस विचार को स्थायी यादें बनाते हुए वैज्ञानिकों, डॉक्टरों, चिकित्सकों और आध्यात्मिक गुरुओं के मार्गदर्शन में किया गया. इस कार्यक्रम में ऑन्टोलॉजिस्ट आशमीन मुंजाल, शमा सोनी, अर्चना अग्रवाल, एनी मुंजाल, रचना कोहली संधू, प्रीति घई, नीवा जैन, श्रीमती सीमा सहित अन्य गणमान्य अतिथि शामिल रहे. वहीं विशेषज्ञों के पैनल में डॉ अशोक चोपड़ा, डॉ संजय सचदेवा, डॉ मंजरी और ब्रह्मकुमारी से रामा बहन, माइंड कोच वेदिशा कौशल, स्वामी लक्ष्मी नारायण, मेधा वर्मा और गिरीश कुलकर्णी शामिल थे,उन्होंने इस बात पर रोशनी डाली कि कैसे अपने शरीर, मन और स्वांस के साथ रिश्ते को मजबूत बनाएं।

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